महाराष्ट्र में धर्मांतरण को लेकर प्रस्तावित कानून को लेकर बड़ी प्रगति हुई है। विधानसभा के बाद अब विधानपरिषद ने भी महाराष्ट्र धर्मांतरण विधेयक 2026 को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही अब यह बिल राज्यपाल की स्वीकृति मिलने के बाद कानून का रूप ले लेगा।
विधानसभा और विधानपरिषद दोनों में इस विधेयक पर जोरदार बहस देखने को मिली। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस कानून का समर्थन करते हुए कहा कि यह किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि अवैध तरीके से होने वाले धर्मांतरण को रोकने के उद्देश्य से लाया गया है।
वहीं विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस और एनसीपी ने इस बिल पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि इसमें कुछ प्रावधान ऐसे हैं, जिनका दुरुपयोग संभव है। हालांकि शिवसेना (UBT) ने इस विधेयक का समर्थन किया है।
नए कानून में स्पष्ट किया गया है that यदि किसी व्यक्ति का धर्म परिवर्तन दबाव, धोखे, लालच या विवाह के जरिए कराया जाता है, तो उसे अवैध माना जाएगा। एक अहम प्रावधान यह भी है कि ऐसे मामलों में आरोपित व्यक्ति को ही यह साबित करना होगा कि धर्मांतरण स्वेच्छा से हुआ है। इसी बिंदु को लेकर विरोध जताया जा रहा है।
सजा के प्रावधान भी कड़े रखे गए हैं। सामान्य मामलों में 3 से 5 साल तक की सजा और जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं यदि मामला महिला, नाबालिग या अनुसूचित जाति/जनजाति से जुड़ा हो, तो सजा बढ़कर 7 साल तक हो सकती है। सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में 10 साल तक की सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
इसके अलावा, कानून में प्रक्रिया को भी स्पष्ट किया गया है। धर्म परिवर्तन करने से पहले संबंधित व्यक्ति को जिला मजिस्ट्रेट को सूचना देनी होगी। साथ ही धर्मांतरण कराने वाले व्यक्ति या संस्था को भी पहले से नोटिस देना अनिवार्य होगा। धर्म बदलने के बाद आधिकारिक घोषणा दर्ज कराना भी जरूरी होगा।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने यह भी स्पष्ट किया कि जो लोग अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहते हैं, उन्हें भारतीय संविधान का अनुच्छेद 25 के तहत पूरी स्वतंत्रता है और इस कानून का उद्देश्य केवल गैरकानूनी गतिविधियों पर रोक लगाना है।